जीवन से लेकर मृत्यु तक गीत-संगीत- सपना

Posted by Rajendra Rathore on 9:16 PM

0 पार्श्व गायिका सपना अवस्थी से राजेन्द्र राठौर की बातचीत

संगीत, जो हर हिंदुस्तानी के तन-मन में रचा-बसा है। यहां की आबो हवा में संगीत है। जीवन से लेकर मृत्यु तक गीत-संगीत हैं। हम हवा में, रोशनी में, पहाड़ों की वादियों में संगीत को महसूस करते हैं। वह संगीत अगर आपके पास हो तो आप भी खुश होने का बहाना ढूंढ लेते हैं, इसीलिए मैं संगीत को हमेशा जीने की कोशिश करती हूं। इसीलिए भी कि यही मेरा कैरियर बन चुका है और खुद हमेशा आनंदित महसूस करती हूं। मैं बहुत खुशनसीब हूं कि ईश्वर ने मेरे हिस्से संगीत दिया।

यह कहना है जाज्वल्य देव लोक महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देने पहुंची मशहूर पार्श्व गायिका सपना अवस्थी का। बचपन से ही गीत-संगीत में विशेष रूचि रखने वाली सपना अवस्थी ने बातचीत में बताया कि वे नवाबों और नफासतों की नगरी लखनऊ में पैदा हुई। उनके पिता संस्कृत के विद्वान थे। शायद यही असर था कि मेरी पढ़ाई भी उसी रास्ते पर हुई। उन्होंने संस्कृत से एमए किया, लेकिन संगीत के प्रति बचपन से ही रूचि थी। इस वजह से उन्होंने भातखंडे संगीत महाविद्यालय से संगीत में विशारद किया। इसके साथ ही साथ छोटी उम्र से थियेटर भी किया करती थी। पिता की दिलचस्पी कला में ज्यादा थी, इसीलिए उनके कहने से थियेटर के साथ संगीत की शिक्षा को भी जारी रखा। वे बताती है कि बचपन में उनका मन बहुत बावरा था, तरह-तरह के सपने देखा करता था। संस्कृत में एमए करने के बाद वे शास्त्रीय संगीत सीखने दिल्ली आई और यहां आकर रंगमंच से जुड़ गई। अपने पति कार्तिक के साथ मिलकर उन्होंने अवधी थियेटर की नींव रखी। टीवी के पहले सोप-ऑपेरा ‘हम लोग’ में अभिनय भी किया।

गांव की माटी से सराबोर, अल्हड़ बंजारन से खनकदार आवाज उनकी अपनी तरह एक खालिस आवाज थी, जिसने नदीम श्रवण से लेकर रहमान जैसे शीर्षस्थ संगीतकारों को भी बेतरह लुभाया। सपना बताती है कि उनके सैकड़ों गीत सुपर-डूपर हिट हुए, इंडस्ट्री में उन्होंने दो दशकों का लंबा समय गुजारा है, उनके संगीत का यह सफर अब भी अनवरत जारी है। गीत-संगीत के मामले में उनका तर्क है कि हर कोई तानसेन या बैजू बावरा बन जाए या रफी और लता मंगेशकर बन जाए, यह जरूरी नहीं है। उसका अंश होना भी हमारे लिए गर्व का विषय है। जो अंश मिला है, उसी से मैं संतुष्ट हूं और उसे पूरी ईमानदारी से लोगों तक पहुंचा रही हूं। स्वर कोकिला लता मंगेशकर को अपना आदर्श मानने वाली सपना अवस्थी जी कहती है कि लता बाई ने शुरू में फिल्म में एक्टिंग भी की थी, अगर एक्टिंग में ही रह जातीं तो आज की लता मंगेशकर को हम कहां ढूंढ पाते?

उन्होंने बताया कि हम लोग संगीतकार चित्रगुप्त के बेटे मिलिंद की सगाई में उनके घर गए थे। इंडस्ट्री के नामचीन लोग उसमें शामिल हुए थे। वहीं गीतकार समीर जी ने मेरी पहचान शेखर कपूर से कराई। मेरी आवाज की समीर जी ने काफी तारीफ कर दी थी। मुझे पहला ब्रेक ‘दुश्मनी’ में मिला, लेकिन मेरी रिलीज होने वाली पहली फिल्म थी ‘इक्का राजा रानी’, जिसमें मेरा गाया गाना हिट हो गया। उसके बाद तो मेरे कैरियर में उछाल आ गया। सच कहूं तो मेरे कैरियर में समीर जी का महत्व अपनी जगह है, लेकिन संगीतकार नदीम-श्रवण ने जिस तरह मेरी आवाज का उपयोग किया, उसने मुझे कहां से कहां पहुंचा दिया। सबसे ज्यादा लोकप्रियता मुझे फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ के गीत ‘परदेसी परदेसी जाना नहीं’ से मिली। इसमें मेरी आवाज को ‘सपना अवस्थी की आवाज’ की पहचान मिली। इस गाने से प्रसिध्दि मिली और अवार्डों की झड़ी लगी। बस, एक बात का अफसोस है आमिर खान की दूसरी फिल्म ‘मेला’ में भी गाने के बावजूद उनसे ढंग से कभी बातचीत नहीं हो पाई। उनकी और भी फिल्मों में गाने की चाहत है।

उन्होंने बताया कि हिन्दी, बंगाली, उड़ीया, राजस्थानी सहित विभिन्न भाषाओं के लगभग 100 फिल्मों में मैंने 200 से त्यादा गाने गाए हैं। मगर एल्बमों को जोड़ दें तो गानों की संख्या 2500 से ऊपर चली जाएगी। शुरू-शुरू में मेरे गाने आज के आइटम सांग्स जैसे थे। उस समय मेरे गानों की काफी आलोचना भी हुई, लेकिन आज वैसे ही गाने हिट हो रहे हैं और लोगों को पसंद आ रहे हैं। मुझे खुशी है कि एआर रहमान के संगीत निर्देशन में मैंने ‘छैयां-छैयां’ गाया था, जो आइटम में ऑल टाइम हिट माना जाता है। एक बात बता दूं कि विदेश में जब शो करने जाती हूं तो सबसे ज्यादा फरमाईश छैयां-छैयां की ही होती है। इस गाने को विदेशी सुनते और उस पर थिरकते हैं।

सपना अवस्थी बताती है कि मुझे जो भी कामयाबी मिली है, इसमें मेरे पति कार्तिक का बहुत बड़ा योगदान है। वही मेरे लिए बात करते हैं। कांप्टीशन गुणी लोगों के बीच होती है, मैं खुद को गुणी नहीं मानती। सच तो यह है कि मुंबई में मुझे ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा। सब कुछ आसानी से और बिना मांगे मिलता रहा, इसीलिए मन को तसल्ली ज्यादा है। घर में प्रतिदिन ज्यादा नहीं सिर्फ 40 मिनट गाने का रियाज करती हूं। कभी तानपुरे पर तो कभी हारमोनियम पर। सपना कहती है कि इस सच को स्वीकार करने में मैं कोताही नहीं करती कि बड़े-बड़े उद्योगपतियों के यहां शादी आदि के मौके पर गाने जाती हूं। उनमें मुंबई, राजस्थान, दिल्ली, कोलकाता का नंबर ज्यादा आता है। वहां जाने को कुछ लोग बुरा भी मानते हैं लेकिन मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता है।

सपना अवस्थी का कहना है कि छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत का अपना एक अलग वजूद है। छत्तीसगढ़ी गीतों को सुनने में काफी मजा आता है, दिल में रोमांच भर जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि छत्तीसगढ़ के दर्शक बहुत जबरदस्त है। इससे भी कही ज्यादा अच्छी छत्तीसगढ़ की अतिथि परंपरा है, जहां हर किसी को घर-परिवार जैसा सम्मान मिलता है। जब भी छत्तीसगढ़ में प्रोग्राम देने का न्योता मिलेगा, मैं जरूर आऊंगी, क्योंकि यहां के दर्शकों के प्यार आगे कोई सीमा या सरहर आड़े नहीं आ सकती। पार्श्व गायिका सपना अवस्थी ने कहा कि छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया........!!!