चिंतन से ज्यादा चरित्र की जरूरत

Posted by Rajendra Rathore on 10:29 PM

भारत अब ज्यादा शहरीकृत है, भारत की जनता ज्यादा उम्मीदें रखने लगी है और शासन की नई व्यवस्था तलाश रही है। कांग्रेस अभी सब कुछ नहीं हारी है। उसे इस बात से सांत्वना मिल सकती है कि गुजरात में सफलता के बावजूद भाजपा की स्थिति उससे भी ज्यादा खराब है।
ऐसे में यूपीए सरकार को बचे हुए कार्यकाल में ये दिखाना होगा कि पार्टी परिणाम भी दे सकती है। राहुल गांधी की बड़ी गलती यह रही कि उन्हें लगा कि सरकार में सुधार किए बिना ही वह संगठन को पुनर्जीवित कर सकते हैं। सरकार में आत्मविश्वास बहुत कम हो गया है और इसे लौटाना ही कांग्रेस की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए सबसे पहले पार्टी नेताओं को संदेश का महत्व समझाना होगा। साथ ही नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को अपने संदेशों में और ज्यादा स्पष्ट होना पड़ेगा। ऎसा नहीं हुआ तो उनकी खामोशी से बने नैतिक व वैचारिक निर्वात को तमाम अन्य शक्तियां भर देंगी। हालाँकि, पुरातनपंथी संघ की बंधक बनी भाजपा शासन की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं सुझा पा रही, लेकिन कांग्रेस को पहचानना होगा कि लोगों में गुस्सा उबल रहा है। अलबत्ता, भारतीय जनता पार्टी से थोड़ा बेहतर होने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस पार्टी को अभी चिंतन से ज्यादा चरित्र की जरूरत है।