यूपीए सरकार में 7 बरस बाद छत्तीसगढ़

Posted by Rajendra Rathore on 10:39 AM

केन्द्र की यूपीए सरकार में 7 बरस बाद छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के एकमात्र सांसद डॉ चरण दास महंत को कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री बनाया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद डॉ महंत प्रदेश के तीसरे व कांग्रेस के पहले केन्द्रीय मंत्री हैं, जिन्हें लंबे अंतराल के बाद मंत्रीमंडल में शामिल किए जाने से छत्तीसगढ़ में उत्सव जैसा माहौल है।
मनमोहन सिंह मंत्रीमंडल में बहुप्रतीक्षित फेरबदल की घोषणा 12 जुलाई को हो गई है। नई सूची से 6 केन्द्रीय मंत्रियों की छुट्टी कर दी गई है, जबकि डीएमके के लिए पद खाली रखा गया है। नए मंत्रीमंडल में छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सांसद डॉ. चरण दास महंत को केन्द्रीय कृषि और खाद्य संस्करण राज्य मंत्री का दायित्व सौंपा गया है। यूपीए के पिछले कार्यकाल से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ से केन्द्रीय मंत्रिमंडल में कोई नहीं था। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला अंतर्गत सारागांव में पूर्व मंत्री रहे स्वर्गीय बिसाहूदास महंत के घर जन्मे डॉ चरणदास महंत अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। अविभाजित मध्यप्रदेश में वे 1 जनवरी 1980 को पहली बार विधायक चुने गए। इसके ठीक एक साल बाद उन्होंने सरकारी आश्वासन संबंधी समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वे 1 फरवरी 1981 को प्रत्यायोजित विधान संबंधी समिति के सदस्य व 1 जनवरी 1985 को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव बनाए गए। वर्ष 1988 में मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें पहली बार कृषि मंत्री बनाया। इसके बाद वे 1993 में वाणिज्यिक कर विभाग में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), 1993 में मध्य प्रदेश विधान सभा के तीसरे कार्यकाल के सदस्य, 1995 में गृह और सार्वजनिक संबंध कैबिनेट मंत्री बने। तीन वर्षो तक मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहने के बाद वर्ष 1998 में वे पहली बार जांजगीर लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए। इसी दौरान वर्ष 1998 में उन्हें विज्ञान व प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और वन संबंधी समिति तथा खाद्य प्रौद्योगिकी के उप-समिति का सदस्य बनाया गया। वर्ष 1998 में वे कोयला मंत्रालय सलाहकार समिति के सदस्य बनाए गए। वर्ष 1999 में 13 वीं लोकसभा के लिए डॉ महंत पुनः निर्वाचित हुए।
पार्टी के प्रति समर्पित डॉ महंत, वर्ष 1999 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी समिति के सदस्य, वर्ष 2000 में रसायन मंत्रालय और उर्वरक सलाहकार समिति के सदस्य, वर्ष 2003 में अनुसूचित जाति-जनजातियों के कल्याण संबंधी समिति के सदस्य बनाए गए। वर्ष 2004 में छत्तीसगढ़ में पार्टी की खराब स्थिति को देखते हुए आलाकमान ने डॉ महंत को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष की जवाबदारी दी, लेकिन पार्टी के नेताओं में आपसी अंर्तकलह की वजह से वे उत्कृष्ट कार्य नहीं कर पाए। वर्ष 2005 के लोकसभा चुनाव में क्षेत्र की जनता ने उन्हें नकारते हुए भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी श्रीमती करुणा शुक्ला को चुना। लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त मिलने के बाद भी डॉ महंत राजनीति में सक्रिय रहे, जिसके मद्देनजर पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने उन्हें 2006 में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष मनोनीत किया।
वर्ष 2009 में हुई 15 वीं लोकसभा चुनाव में किस्मत ने एक बार फिर डॉ महंत का साथ दिया और परिसीमन के बाद जांजगीर से कोरबा लोकसभा क्षेत्र में किस्मत आजमाने वाले डॉ महंत फिर सांसद चुने गए। इस चुनाव में उन्होंने अपने पुराने प्रतिद्धंदी व भारतीय जनता पार्टी की प्रभावशाली नेता करुणा शुक्ला को भारी मतों से हराया। 15 वीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 11 उम्मीदवारों में से अकेले डॉ महंत ही सांसद निर्वाचित हुए। तब लोगों में उम्मीद ही नहीं, बल्कि पूरा भरोसा था कि डॉ महंत को केन्द्रीय मंत्रीमंडल में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पार्टी आलाकमान ने उन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी समिति के सदस्य, संसद सदस्यों के वेतन और भत्ते संबंधी संयुक्त समिति के अध्यक्ष, कोयला पर परामर्शदात्री समिति के सदस्य तथा केन्द्रीय ग्रामीण विकास परिषद के सदस्य की जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन छत्तीसगढ़ से एकमात्र सांसद होने के बावजूद मंत्रीमंडल में शामिल नहीं किया। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान मंत्रीमंडल में जब भी फेरबदल हुआ, तब लोगों में डॉ महंत को मंत्री बनाए जाने की आश जगी, लेकिन केन्द्रीय मंत्रीमंडल में छत्तीसगढ़ को तव्वजो न देकर मनमोहन सरकार ने हर बार प्रदेश की ढ़ाई करोड़ जनता के विश्वास पर कुठाराघात करते हुए उनकी जायज मांग को नकारा। इस बात से छत्तीसगढ़ के ज्यादातर लोगों में केन्द्र सरकार के प्रति गहरा असंतोष था। लोगों का यही कहना था कि छत्तीसगढ़ राज्य से एकमात्र सांसद चुने जाने के बावजूद डॉ महंत को आखिरकार मंत्रीमंडल में क्यों शामिल नहीं किया जा रहा है?
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की दिनों-दिन बिगड़ती स्थिति और जनता की मांग के आगे मनमोहन सरकार को आखिरकार अब झुकना पड़ा और नए मंत्रीमंडल में डॉ महंत को शामिल किया गया। डॉ महंत को मंत्री बनाए जाने के बाद अब यह भी बाते सामने आ रही है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को लुभाने की दृष्टि से उन्हें मंत्री बनाया गया है। जानकारों का मानना है कि पिछड़ा वर्ग 2003 से ही कांग्रेस से दूरी बनाए हुए है, जिस कारण राज्य में कांग्रेस को भाजपा के हाथों शिकस्त मिली थी। बहरहाल, जनता को आज इस बात की सर्वाधिक खुशी है कि 7 साल के इंतजार के बाद केन्द्र सरकार ने डॉ महंत को मंत्री बनाकर छत्तीसगढ़ को अनोखा उपहार दिया है।