लोगों को जीवनदान दे रहे चांपा के युवा

Posted by Rajendra Rathore on 9:19 AM

0 संजीवनी से मिल रहा है जरूरतमंदों को रक्त
0 शहर के लिए मिसाल बना वेद सामाजिक संगठन

कोसा, कांसा और कंचन की नगरी चांपा की पहचान अब रक्तदान के नाम से प्रदेश में बन रही है। यहां के एक हजार जागरूक युवाओं ने वेद सामाजिक संगठन के माध्यम से जरूरतमंदों को नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया है। संगठन से जुड़ा हर युवा खुद भी रक्तदान करता है। युवाओं का यह प्रयास बीमार और खून की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए संजीवनी का काम कर रहा है।
रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता। रक्तदान का महत्व लोगों को उस समय समझ में आता है, जब उनके किसी परिजन को जिंदगी बचाने के लिए खून की जरूरत पड़ती है। ऐसे समय में लोगों को एक एक बूंद खून के लिए यहां-वहां भटकना पड़ता है। कई बार संबंधित समूह का रक्त तो मिल जाता है, लेकिन परीक्षण के बाद वह मरीज के काम नहीं आता। वहीं कई समूहों के रक्त के लिए लोगों को भटकना पड़ता है। ऐसे लोगों के लिए चांपा शहर के युवाओं द्वारा बनाया गया वेद सामाजिक संगठन कारगर साबित हो रहा है। इस संगठन में चांपा शहर के 1000 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं, जिन्होंने बकायदा एक पुस्तिका तैयार की है, जिसमें रक्तदाता का नाम, पता, मोबाईल नंबर रक्त समूह की जानकारी दी गई है। इस संगठन से जुड़े युवा कभी भी, कहीं भी रक्तदान करने से पीछे नहीं हटते। संगठन में ऐसे कई युवक युवतियां हैं, जिन्होंने दर्जनों बार अपना खून जरूरतमंदों को नि:शुल्क देकर उनकी जान बचाई है। संगठन के अध्यक्ष अरूण गुप्ता सचिव छत्रपाल सिंह क्षत्री ने बताया कि कई बार जरूरतमंद मरीजों और दुर्घटना के शिकार लोगों को समय पर खून नहीं मिलने से जान गंवानी पड़ती है। दुर्घटना का शिकार हममें से कोई भी हो सकता है, ऐसे में समय पर रक्तदान कर किसी की जिंदगी बचाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। इसी उद्देश्य से ही सामाजिक संगठन वेद का गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि उनके सहयोगी युवा हमेशा चांपा आसपास के चिकित्सालयों के संपर्क में रहते हैं। साथ ही उन्होंने रक्तदान करने वालों की सूची भी अस्पतालों में दे रखी है। यहां बताना लाजिमी होगा कि चांपा शहर में युवाओं का एक ऐसा वर्ग है, जो दशकों से रक्तदान करता रहा है। लगभग 20 बार रक्तदान कर चुके कपड़ा व्यवसायी अशोक भावनानी ने बताया कि वे अपने मित्रों के साथ हमेशा रक्तदान करते रहे हैं। चांपा में रक्तदान के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास उन्होंने अपने सहयोगियों से मिलकर शुरू किया था। जो आज नवयुवकों के लिए प्रेरणास्त्रोत बना है। शहर के युवाओं का जज्बा जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश के लोगों के लिए एक मिसाल बन रहा है।
इस
सम्बन्ध में बीडीएम अस्पताल चाम्पा के वरिष्ठ चिकित्सक डा. के. पी. राठौर ने बताया कि एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान कई जिंदगियां बचाता है। रक्तदान करने से शरीर में किसी तरह की कमजोरी नहीं आती, लेकिन दोबारा रक्तदान करने के लिए तीन महीने का अंतर जरूरी है। एक समय में कोई भी रक्तदाता 300 मिलीलीटर रक्तदान कर सकता है।