लोकतंत्र को लोगों के द्वार पहुंचाया स्व. राजीव गांधी ने

Posted by Rajendra Rathore on 3:34 AM

पुण्यतिथि पर विशेष

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने शासनकाल में त्रिस्तरीय पंचायती राज लागू करवा के लोकतंत्र को लोगों के द्वार तक पहुंचा दिया। पंचायती राज संबंधी कानून के कारण ही लोकतंत्र को चुस्त बनाने में काफी मदद मिल रही है। आज देश में ढाई लाख पंचायतें एवं 32 लाख चुने हुए प्रतिनिधि हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें 12 लाख से ज्यादा महिलाएं चुनकर आई हैं। पंचायती राज संस्थाओं में खासकर महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के उम्मीदवारों की भागीदारी काफी बढ़ी है, जो हमारे लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।

पंचायती राज कानून ने आज देश के गांवों की दशा पूरी तरह बदल कर रख दी है, गांवों में लाखों के विकास कार्य हुए है। विकास कार्य लगातार जारी भी है, फिर भी जनप्रतिनिधियों की मनमानी व हेराफेरी से पंचायती राज कानून पूरी तरह से फलीभूत नहीं हो पा रहा है। खैर आज इस मसले पर इसलिए बात की जा रही है, क्योकि पंचायती राज व्यवस्था को धरातल पर लाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की 21 मई को पुण्यतिथि है। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके पुत्र राजीव गांधी भारी बहुमत के नौवें प्रधानमंत्री बने थे। उसके बाद 1989 के आम चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और पार्टी दो साल तक विपक्ष में रही। 1991 के आम चुनाव में प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक भयंकर बम विस्फोट में राजीव गांधी की मौत हो गई थी।
पंचायती राज के बारे में राजीव गांधी का जो सपना था, वह अभी तक अधूरा है। स्व. राजीव गांधी का मानना था कि व्यावहारिक स्तर पर देखने में आता है कि पंचायती राज संस्थाओं की विकास योजनाओं में नौकरशाही अड़चनें पैदा करती है। इसके अलावा पंचायती राज संस्थाओं के मामले में कई राज्य सरकारों का रवैया उपेक्षापूर्ण रहता है। यदि सांसद, विधायक एवं राज्य सरकारें पंचायती राज संस्थाओं के मामले में अधिक रूचि दिखाए तो इन संस्थाओं के माध्यम से जमीनी स्तर पर विकास के कार्यों को तेज गति से अंजाम दिया जा सकता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सहित देश के प्रमुख नेताओं ने इसका स्वप्न देखा था। यदि पंचायती राज संस्थाएं आज ढंग से काम नहीं कर पा रही हैं तो इसके लिए कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती क्योंकि कानून लागू होने के बाद करीब सवा दशक तक उनकी सरकार केन्द्र में रही।
राजीव गांधी कहते थे कि केन्द्र से जारी किए गए एक रूपए में से मात्र 15 पैसे ही जनता तक पहुंच पाते हैं। अब उनके पुत्र व सांसद राहुल गांधी कह रहे हैं कि जनता तक मात्र दस पैसे ही पहुंच पा रहे हैं। एक तरह से स्थिति में जो गिरावट आई है, क्या कांग्रेस शासित सरकारें उसके लिए दोषी नहीं हैं। आज इस बात की बेहद जरूरत है कि पंचायती राज संस्थाओं द्वारा कराए जाने वाले कामकाज की ’सोशल आडिट’ हो। इससे उनकी जवाबदेही बढ़ेगी। सोशल आडिट नौकरशाहों की बजाय जन प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों से करवाया जाना चाहिए। ग्रामीण आबादी शहरों की तरफ नहीं भागे, यह सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना बेहद जरूरी है। राजीव गांधी ने इसी लक्ष्य के साथ संबंधित कानून बनाने की पहल की थी। राजीव गांधी चाहते थे कि पंचायती राज संस्थाएं विकास के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हो, इसके लिए जरूरी है कि विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं को इन संस्थाओं के जरिए लागू करवाया जाए, तभी गांवों के विकास में मदद मिलेगी।