अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक ठीक नहीं : अमित जोगी

Posted by Rajendra Rathore on 11:18 PM

छत्तीसगढ़ की रमन सरकार उद्योगपतियों के हाथों बिक चुकी है। कृषि भूमि पर उद्योगों को स्थापित करने रमन सरकार दलाल की भूमिका निभा रही है। आज कांग्रेसियों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी रोक लगाई जा रही है, जो सरासर गलत है।
ये बातें युकां नेता अमित जोगी ने बाराद्वार के विश्राम गृह में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि वे ग्रामीणों के आग्रह पर पावर की जनसुनवाई में अपनी बात रखने जा रहे थे, लेकिन पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने आग्रह को अस्वीकार करते हुए गिरफ्तार कर लिया। राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों के साथ अन्याय किया जा रहा है। जांजगीर-चांपा जिला कृषि प्रधान है। यहां की 87 फीसदी जमीन सिंचित है। राज्य स्थापना के पूर्व यह जमीन असिंचित थी, जिसे प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने हसदेव बांगो परियोजना के तहत् 8 हजार किलोमीटर लंबी नहर बनवाकर किसानों को सिंचाई की सुविधा दिलाई। जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री नहर व नदी नालों को पाटकर उसे उद्योगों को दे रहे हैं। जिले में 34 कंपनियों से पावर प्लांट के लिए सरकार ने करार किया है, जिससे 33 हजार 400 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इन पावर प्लांट से प्रतिमाह निकलने वाले एक करोड़ 28 लाख टन राखड़ से पर्यावरण की क्या दशा होगी इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि एक तरफ सरकार नहर व नदियों को नहीं पाटने की बात कहती है वहीं दूसरी ओर रोगदा बांध व अन्य नहरों को प्रभावित कर सिंचाई की सुविधा खत्म कर रही है। नदियों में बराज की स्थापना से आने वाले दिनों में स्थानीय लोगों को पानी की एक एक बूंद के लिए तरसना पड़ेगा। प्रदेश में कई ऐसे जिले हैं, जहां की जमीन बंजर है। वहां सरकार पावर प्लांट लगाने के लिए क्यों करार नहीं करती। इन बातों का विरोध करने पर रमन सरकार कांग्रेसियों को बोलने के अधिकार से भी वंचित कर रही है। जनप्रतिनिधियों की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट है कि सरकार पूरी तरह से तानाशाही रवैया अपना रही है। पावर प्लांट के विरोध में कांग्रेसी लंबी लड़ाई लड़ेंगे। भले ही इसके लिए उन्हें जेल क्यों न जाना पड़े। उन्होंने पावर प्लांट के लिए ली गई किसानों की जमीन को वापस करने तथा जिले में प्रस्तावित पावर कंपनियों का एमओयू रद्द किए जाने की मांग की।