कैमरे ने लाई दुनिया में कई क्रांतियां

Posted by Rajendra Rathore on 9:30 AM

एक अच्छी फोटो हजारों शब्दों से लिखी इबारत के बराबर होती है, लेकिन कुछ तस्वीरें ऐसी भी हैं, जिनकी अभिव्यक्ति के लिए लाख कोशिशों के बाद शब्द मिलते हैं। इसे कैमरे की पैनी नजर ही कहा जा सकता है, कि जिसने एक बच्ची के आधे दफनाए हुए पथरायी आंखों वाले शव की फोटो को पूरे विश्व में भोपाल गैस त्रासदी का प्रतीक बना दिया।
दुनिया में कैमरे की वजह से कई क्रांतियां भी आई है। वियतनाम युद्ध के दौरान एक सैनिक को बुरी तरह मारे जाने का हाल बयान करती एक तस्वीर ने तो जनक्रांति ला दी थी। तस्वीर का ही प्रभाव था कि उस ओर दुनिया का ध्यान जाने के बाद वहां युद्धविराम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें शुरू हुई। यही नहीं, ग्वांतानामो बे कैदगाह में अमेरिकी सैनिकों द्वारा युद्धबंदियों से अमानवीय व्यवहार करने सम्बन्धी तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद उस जेल को बंद करने के प्रयास शुरू होना शामिल है। वहीं द्वितीय विश्व युद्ध के खात्मे पर अमेरिका के प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वायर पर मनाए जा रहे जश्न के दौरान एक नर्स एडिथ के अपरिचित अमेरिकी सैनिक का चुंबन लेते हुए खींची गई तस्वीर उस भयावह युद्ध के इतिहास की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक है। इस तस्वीर को फोटोग्राफर अल्फ्रेड आइजेनस्टाड्ट ने 1945 ईस्वी में लिया था, जिसे सबसे पहले ’लाइफ’ पत्रिका ने प्रकाशित किया था। कैमरे ने भोपाल गैंस काण्ड के दौरान भी अहम् भूमिका अदा की। वह देश के प्रख्यात फोटोग्राफर रघु राय के कैमरे का ही कमाल था कि भोपाल गैस त्रासदी की शिकार एक बच्ची के आधे दफनाए गए पथरीली आंखों वाले शव की फोटो दुनिया में उस त्रासद घटना की प्रतीक बन गई। रघु राय द्वारा खींची गई फोटो को सभी अखबार व टीव्ही चैनलों ने प्रमुखता से दिखाया, जो आज भी जारी है। जब कभी भी भोपाल त्रासदी के मुद्दे उठते हैं या फिर कोर्ट या सरकार कोई फैसला जारी करती है, तब उसी बच्ची के आधे दफनाए गए पथरीली आंखों वाले शव की फोटो को खबर के साथ प्रकाशित किया जाता है। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि गैस त्रासदी को लेकर अखबारों में लाखों कागज काले किए गए, लेकिन वह एक फोटो उस कांड के वीभत्स रूप से उसके असल रूप में पेश करने के लिए ही काफी रहा है। रघु राय कहते हैं कि मानवीय भावनाओं, मूल्यों, परम्पराओं, इच्छाओं, भाव-भंगिमाओं को उनकी आत्मा के साथ अपने पटल पर कैद करने वाले कैमरे से फोटो खींचने के लिए दिमाग को ’शट अप’ करना पड़ता है, क्योंकि फोटोग्राफी दिल से की जाती है। ऐसे कई मौके आए है, जब एक फोटो ने अखबारों में प्रकाशित होने वाले 4 कॉलम के खबर को मात दी है। आज विश्व भर में कैमरे का विशेष महत्व है। आमतौर पर कलम की धार को तलवार से तेज माना जाता है, लेकिन कई मर्तबा कैमरे ने भी यह साबित कर दिखाया है कि उसकी धार भी कुछ कम नहीं है।
इसके इतिहास पर गौर करें तो कैमरा शब्द लैटिन के कैमरा ऑब्स्क्योरा से आया है जिसका अर्थ अंधेरा कक्ष होता है। ध्यान रखने योग्य है कि सबसे पहले फोटो लेने के लिए एक पूरे कमरे का प्रयोग होता था, जो अंधकारमय होता था। कहा जाता है कि कैमरे का आविष्कार ईराकी वैज्ञानिक इब्न-अल-हजैन (1015-1021) ने की। इसके बाद अंग्रेज वैज्ञानिक राबर्ट बॉयल एवं उनके सहायक राबर्ट हुक ने सन 1660 के दशक में एक सुवाह्य (पोर्टेबल) कैमरा विकसित किया। सन 1685 में जोहन जान ने ऐसा कैमरा विकसित किया, जो सुवाह्य था और तस्वीर खींचने के लिये व्यावहारिक था। कुल मिलाकर कैमरा ही ऐसा हथियार है, जिससे पत्रकारों को न केवल खबर लिखने में सहूलियत होती है, वरन् फोटो से खबर की वास्तविकता भी झलकती है। वर्तमान दौर में कैमरे के बिना प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया का काम चल पाना कठिन ही नहीं, बल्कि असंभव है।