परिवार का हिस्सा बने अजगर

Posted by Rajendra Rathore on 4:08 AM

- दो सौ वर्षो से हैं आंगन के पीपल पेड़ में

- अब तक किसी को नहीं पहुंचाया नुकसान
दो सौ वर्षों से भड़ेसर के एक घर के आंगन में लगे पीपल पेड़ की कोटरों को अपना आशियाना बनाए सैकड़ों अजगर उस परिवार का हिस्सा बन गए हैं। विशालकाय इन अजगरों ने अब तक किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है।
जांजगीर से महज १२ किलोमीटर दूर ग्राम भड़ेसर के बंधवा मोहल्ला में महात्मा राम पाण्डेय वर्तमान में अपनी पत्नी श्रीमती बीना पाण्डेय के साथ निवास करते है। श्री पाण्डेय के दो बेटे और दो बेटियां है, जिनकी शादी हो चुकी है। अपने चारों बच्चों को श्री पाण्डेय ने जितना स्नेह और दुलार से पाला है, उतने ही दुलार से वे अपने घर के आंगन के पीपल पेड़ में विशालकाय अजगरों को पाल रहे हैं। दो सौ वर्ष पुराने पीपल पेड़ का तीन हिस्सा टूट चुका है, जबकि शेष हिस्सा पूरी तरह से खोखला है। इसमें करीब डेढ़ सौ छोटे-बड़े अजगरों का बसेरा है। श्री पाण्डेय इन अजगरों को रोजाना अपने घर के आंगन में अटखेलियां करते देखकर काफी खुश होते है, क्योंकि बच्चों की शादी होने तथा नौकरी में बाहर जाने के बाद यही अजगर तो हैं जो उनकी दिनचर्या का अंग बने हुए हैं। सुबह सोकर उठने के बाद श्री पाण्डेय सबसे पहले पीपल को देखते है, जिसमें कई अजगर लटकते रहते है, तो कभी एक-दूसरे पर चढ़ते है। बचपन से ही अजगर के प्रति लगाव रखने वाले 55 वर्षीय श्री पाण्डेय बताते हैं कि जिस जगह पर वे वर्तमान में मकान बनाकर निवास कर रहे है, वह पहले खेत था। दो सौ वर्ष पहले उस जगह में उनके दादा स्व। बेदप्रसाद पाण्डेय ने घर से कुछ अजगरों को लाकर रखवाया था, तब से वहां पर के पीपल पेड़ को अजगर अपना आशियाना बनाए हुए हैं। वे बताते हैं कि सभी अजगर एक साथ बड़े स्नेह से रहते हैं। धूप निकलते समय अजगर के छोटे बच्चे बड़े अजगरों के ऊपर चढ़कर खेलते हैं। गर्मी ठंड के मौसम में अजगर पेड़ के कोटर से बाहर निकलकर आंगन में खेलते रहते हैं। कई अजगर अठखेलियां करते आसपास के घरों में भी चले जाते है, जो कुछ देर दोबारा पेड़ पर वापस जाते हैं। वर्तमान में तेज ठंड पड़ने की वजह से धूप तापने के लिए पेड़ के कोटरों से अजगर बाहर निकल रहे हैं। इन अजगरों का रंग पेड़ के टहनियों की तरह हूबहू मिलता है, जिसकी वजह से ये अजगर दूर से पहचान में नहीं आते। जबकि पेड़ के पास जाकर देखने से एक ही समय में टहनियों में दस-बीस नहीं बल्कि पचास से ज्यादा अजगर धूप तापते बैठे रहते हैं। वहीं कुछ अजगर पेड़ के नीचे रखे पैरा में फैले रहते हैं। अजगरों को देखने के लिए कोरबा, बिलासपुर, रायगढ़, सारंगढ़, तखतपुर, लोरमी, पण्डरिया, रायपुर सहित कई शहरों गांवों से लोग पहुंचते हैं। खास बात यह है कि इन अजगरों ने घर के किसी सदस्य को अब तक कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। श्री पाण्डेय बताते हैं कि पेड़ में बैठे पक्षी को भी अजगर किसी तरह का नुकसान नहीं पहुचाते पीपल पेड़ में रहने वाले करीब अजगरों को श्री पाण्डेय ने आसपास के गांव सेमरा, खोखरा, मुनुंद, धनेली से लाया है। वे बताते है कि आसपास के गांवों के कई लोग अपने घर के अजगर को पेड़ में रखने के लिए उन्हें दे देते है, उसे वे लाकर पेड़ में रख देते हैं। बाहर के गांवों से लाए अजगर तथा वर्षो से पेड़ में रहने वाले अजगर कुछ दिनों बाद आपस में घुलमिल जाते हैं। बहरहाल श्री पाण्डेय का अजगर प्रेम अपने आप में देश दुनिया के लोगों के लिए मिसाल है।